पाती सांवरिया के नाम❤️😍


 

प्रिय कन्हाई ,
मैया मेरी कामनाएं स्वीकारी होगी और आशावान्वित हूं कि तुम यूंही चिरयौवनी होंगे  पिछले पत्र मे तुम बताये थे कि नये मित्र भी बने है और तुम जीवनगाथा भी लिखना चाहते हो, मैं प्रश्न भी की थी कि तुम कौन हो मेरे?? उत्तर तो एक निश्चित मुझे भी नही ज्ञात
प्रिय मेरे समय चक्र के गति और इस जीवन की गति में तुम्हारा स्थान अद्वितीय है,मेरे कल्पना से भी परें
तुम मेरे प्रारब्ध का वो संचित अंश हो जहां मैं अवश्य इतना पुण्य पूर्वजन्म मे की होऊंगी कि अपना ग्रास किसी अन्य अतृप्त को दे स्वयं इस पुण्य का भागी बनी होऊंगी
प्रिय,ये यात्रा सुगम नही थी जीवन चक्र के भंवरजाल मे फंसे हम ऐसी यात्रा शिशुकाल से किए जहां हम एकाकीपन में थे
मित्रता या कोई भी संबंध मेरे लिए अपरिचित थे मैं किसी को मित्र संबोधित भी कर दूं तो उसकी परिभाषा मात्र एक संबोधन था क्योंकि इतना ही पता था,ज्ञात तो ये भी नही कि मैं कितना ईमानदार हूं तुम्हारे प्रति अपने कर्तव्य को लें और न ये एक निश्चित तौर पर ज्ञात की तुम कौन हो मेरे? यहां सबकुछ अपरिभाषित है मैं अपने अस्तित्व को भी तुमपर नही थोपती हम सहयात्री है और तुम अक्षय पुण्य ,मेरे नियति का श्रेष्ठ रचना और गर्वित हो ये स्वीकार करती हूं कि चयन नायाब है
ईश्वरीय तुम खुद हो बस तुम्हें बनाये रखे , तुम्हें लिखते हुए मैं मौन का सफर करती हूं और शब्दकोश लुप्त हो जाते है
दृश्यावलोकन मे बस तुम्हारा होना ही है कोई अर्थ नही और कोई परिभाषा नही और ना कोई स्वीकृति

यूं ही मेरे ब्रह्मांड का सूर्य बने रहो,आत्मीयता हर संबंध से श्रेष्ठ संबंध है
                                 अपार नेह