मेरे कृष्णा
माधव मेरे हिस्से मे तुम हो
तप रही संवेदना का भार तुम उठा रहे
सून रहे जग की टेर ,नैनो से बुझा रहे
प्यास गहरी है युगो की,
इस जन्म मुझमे ही तुम हो
माधव मेरे हिस्से मे तुम हो.........
स्मृति याद है जब हम तुम सखा थे
नित प्रेम मे हम यूं हवा संग घुलते
जब हारते तुम नेह युद्ध में
प्राण चोटी पकड़ कर खींचते
आज भी उस मोह पाश में
बांधे हुए तन मन को तुम हो
माधव मेरे हिस्से में तुम हो......
जग मांगता यश ,मान , कीर्ति
धन , रूप ,यौवन की अटारी
मुझको कन्हाई चाह ना है
तू सून ले सबकी आप बीती
सब बांट देना खुद को बचाकर
मेरे जीवन के सिर्फ अधिकारी तुम हो
माधव मेरे हिस्से में तुम हो.....
बस दे सको तो अपना नाम दे दो
अपने जीवन से आयाम दे दो
पकड़ कर खींच लो कर्म पथ में
जीवन युद्धभूमि के कर्मयोग का ज्ञान दे दो
सर्व कर्म तुमसे, सर्वज्ञान का अभिसार तुम हो
माधव मेरे हिस्से में हिस्से में तुम हो
©- भार्गवी श्रीऋ
%20-%202022-03-31T084253.721.jpeg)
Post a Comment